हाथसेमैलाढोनेकीकुप्रथा कोखत्मकरनेऔर पीडितोों को न्याय डिलाने को आगे आईों मशहूर सामाडिक और मानवाडिकार काययकताय एिवोके ट आभा डसोंह

क्या आपने कभी सोचा है कक आज जब हम अपने तकनीकी कौशल के दम पर आज चााँद, मंगल और न जाने कहााँ तक अन्तररक्ष में पहाँच जाने का दावा तो करते हैं, परंतु आज भी हमारे समाज और हमारे इदद कगदद हजारों की तादाद में ऐसे लोग या मजदूर मौजूद हैं कजनसे हाथ से मैला साफ करवाने जैसा अमानवीय और घृकित काम करवाया जाता है। ऐसे मजदूरों की जान पर तब बन आती है जब उन्हें मजबूरी में कबना ककसी सुरक्षा उपकरि के जान की बाजी लगाकर सीवर या नाले में उतरना पड़ता है और कई दफा दम घुटने से उनकी मौत भी हो जाती है। हाल के महीनों में ऐसी झकझोर देने वाली घटनाएं मुंबई और महाराष्ट्र में कु छ ज्यादा ही हई हैं।

ऐसे असहाय मजदूरों और उनके पररवार वालों को इंसाफ कदलाने के मकसद से देश की मशहूर मानवाकिकारकायदकतादएडवोकेटआभाकसंहनेइसके खिलाफएकयुद्धछेड़कदयाहै।उन्होनं ेबॉम्बे हाई कोटद में 18 कदसंबर 2019 को एक जनकहत याकचका दायर की है कजसमे उन्होनं े हाथ से मैला या सीवर साफ करने की कु प्रथा को अस्पृश्यता और अमानवीय प्रथा करार कदया है और इसे संकविान के आकटदकल 17 का उल्लंघन भी बताया है।

क्या है हाथ से मैला ढोना (मैनुअल स्के वेंडिोंग)?

ककसी व्यखि द्वारा शुष्क शौचालयों या सीवर से मानवीय मल-मूत्र को हाथ से साफ करनेउसे कसर पर रिकर ले जानेउसका कनस्तारि करने या ककसी भी प्रकार की शारीररक सहायता से उसे संभालने को हाथ से मैला ढोना या अंग्रेजी में मैनुअल स्के वेंकजंग कहते हैं। आभा कसंह इसे आिुकनक युग में गुलामी प्रथा का नया रूप मानती हैं।

मुंबईजैसेबड़ेमहानगरोंमेंमजदूरोंकोसीवरयागटरमेंउतारकरउनसेककसीप्रकारके अवरोिको

हटावाया जाता है ताकक मैले का बहाव बाकित न हो। अक्सर मजदूरों को मैले के गटर में उतरने या

उतारने से पहले उन्हें छक कर शराब कपलाई जाती है ताकक वे दुगंि का सामना करने के कलए

मनोवैज्ञाकनक रूप से तैयार रहें। जबकक कायदे के अनुसार मजदू रों को नाले में उतारने से पहले उन्हे

सेफ्टी कगयर कदया जाना चाकहए। हालांकक यह कनतांत रूप से गैर कानूनी होता है। इस प्रकिया में

अक्सर बाल्टीझाड़ और टोकरी जैसे सबसे दककयानूसी और पुराने उपकरिों का उपयोग ककया जाता ू

है। इस कु प्रथा का संबंि भारत की जाकत व्यवस्था से भी है।

हालांकक हाथ से मैला ढोने की प्रथा को 25 साल पहले ही प्रकतबंकित ककया जा चुका है कफर भी यह इसकलए प्रचलन में है क्यूंकक शौचालयों का कनमादि ठीक से नही ं ककया जाता है। ऐसे मजदू रों के कलए काम कर रही देश की संभवतः इकलौती संस्था “सफाई कमदचारी आंदोलन” के एक आाँकड़े के अनुसार कफलहाल देश में तकरीबन 26 लाि ऐसे गंदे शौचालय हैं कजनका कनमादि वैज्ञाकनक तरीके से नहींककयागयाहैऔरकनयकमतअंतरालपरउन्हेसाफकरनेके कलएमजदूरोंकीजरूरतपड़तीरहती है, जो गाहे बगाहे उनकी जान भी छीनती रहती है।

क्या है कानून ?

मैनुअल स्कै वेंिसय के रूप में रोज़गार का डनषेि और उनका पुनवायस अडिडनयम, 2013

(Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013):

  •   यह अिकनयम हाथ से मैला ढोने वाले व्यखियों द्वारा ककये जा रहे ककसी भी कायद या रोज़गार का कनषेि करता है।

  •   यह हाथ से मैला साफ करने वाले और उनके पररवार के पुनवादस की कज़म्मेदारी राज्यों पर आरोकपत करता है।

  •   इस अकिकनयम के तहत हाथ से मैला ढोने वाले व्यखियों को प्रकशक्षि प्रदान करनेउन्हे लोन देने और आवास प्रदान करने की भी व्यवस्था की गई है।

  •   इस अकिकनयम के प्राविानों के अनुसार 21 राज्यो/ं कें द्रशाकसत प्रदेशों में कजला कनगरानी सकमकत, 21 राज्यों में राज्य कनगरानी सकमकत और राज्यों में राज्य सफाई कमदचारी आयोग का कनमादि ककया गया है।

    गौरतलब है कक महात्मा गााँिी और डॉअंबेडकरदोनों ने ही हाथ से मैला ढोने की प्रथा का पुरजोर कवरोिककयाथा।यहप्रथासंकविानके अनुच्छेद15,21,38और42के प्राविानोंके भीखिलाफहै। आज़ादी के दशकों बाद भी इस प्रथा का जारी रहना देश के कलये शमदनाक है और जल्द से जल्द इसका अंत होना चाकहये।

    चचाय में क्यो?ों

    सामाकजक न्याय मंत्रालय के अनुसारहाथ से मैला ढोने वाले व्यखियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली मौतों के संदभद में उत्तर प्रदेश टॉप पर है और महाराष्ट्र दू सरे स्थान पर है। ताजा आाँकड़े बताते हैं कक साल 2019 में उत्तर प्रदेश में 21 और महाराष्ट्र में 17 लोगों की जान सीवर में कगरकर चली गईऔरउसमेंसेककसीभीमृतकके पररवारवालोंकोकोईभीमुआवजानहींकमला।मंत्रालयनेयह भी कहा है कक 6 कदसंबर 2013 से 31 जनवरी 2020 तक कु ल 62,904 लोग हाथ से मैला ढो रहे थे।

    मुख्यड ोंिु:

  •   भारत में वषद 1993 से 31 कदसंबर, 2019 तक हाथ से मैला ढोने वाले व्यखियों की सीवर की सफाई के दौरान होने वाली 926 मौतों में से 172 पीकड़तों के पररवारों को अभी तक मुआवज़ा नहीं कमला है।

  •   राष्ट्ीयसफाईकमदचारीआयोग(NationalCommissionforSafaiKaramcharis-NCSK)के आाँकड़ों के अनुसारगुजरात में ऐसे सवादकिक मामले (48) पाए गए जहााँ राकश का भुगतान या तो ककया नही ं गया या अपुष्ट् (Unconfirmed) था। जबकक महाराष्ट्र में ऐसे 32 मामले पाए गए।

    अन्य तथ्य:

     मैनुअल स्कै वेंजसद के रूप में रोज़गार का कनषेि और उनका पुनवादस अकिकनयम, 2013 (Prohibition of Employment as Manual Scavengers and their Rehabilitation Act,

2013) के अंतगदत गकठत कें द्रीय कनगरानी सकमकत ( Central Monitoring Committee) की एक बैठक में उपयुदि कानून के कियान्वयन की समीक्षा की गई।

  •   इस बैठक के दौरान हाथ से मैला ढोने वाले के पुनवादस में कपछड़ने वाले राज्यों को भी अनुपालन करने के कलये कहा गया।

  •   तकमलनाडु में इस तरह की मौतों की संख्या सवादकिक थीइन 234 मामलों में से सात को छोड़कर सभी मामलों में मुआवज़े का भुगतान ककया गया था।

  •   गुजरात राज्य में दजद 162 मैला ढोने वालों की मौतों में से 48 में भुगतान करना या भुगतान की पुकष्ट् करना बाकी था और 31 मामलों में मुआवज़ा पाने वाले कानूनी उत्तराकिकारी का पता नहीं लगाया जा सका।

  •   NCSK द्वारा वषद 2018 में हए एक सवेक्षि के अनुसारहाथ से मैला ढोने में लगे कु ल 53,598 व्यखियों में से 29,923 अके ले उत्तर प्रदेश के थे।

  •   35,397 मामलों में एकमुश्त नकद सहायता का कवतरि ककया गया था कजनमें से 19,385 व्यखि के वल उत्तर प्रदेश से थे।

  •   1,007 और 7,383 मैला ढोने वाले व्यखियों को िमशः सखिडी पूंजी और कौशल कवकास प्रकशक्षि प्रदान ककया गया था।

    राष्ट्ीयसफाईकमदचारीआयोगके अनुसार,हाथसेमैलाढोनेवालेव्यखियोंकीसीवरकीसफाईके दौरान होने वाली मौतों के संदभद में महाराष्ट्र और गुजरात राज्य ने सबसे कम संख्या में मुआवज़ा प्रदान ककया है।

    िनडहत याडचका

    श्रीमती आभा कसंह ने अपनी जनकहत याकचका दायर करने से पहले प्राकहकबशन आफ इम्प्लायमेंट आफ मैन्युअल स्कै वेंजसद एं ड देयर ररहैकबकलटेशन ऐक्ट 2013 (PEMSR ACT) की िाकमयों का अध्ययन ककयाऔरपायाकककमोबेशदेशभरके सभीमहानगरपाकलकायानगरपाकलकाओंके अकिकाररयोंने अपनी कजम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के कलए बड़ी ही चतुराई के साथ गटर साफ करने का काम प्राइवेट एजेंकसयों को आउटसोसद कर कदया। इसकी पुकष्ट् वायर द्वारा फाइल की गई आरटीआई से भी हई है कजसमें जवाब कदया गया कक सुप्रीम कोटद द्वारा तय ककए गए 10 लाि रुपये के हजादने को अभी तक देशभर में ककसी भी पीकड़त पररवार को नहीं कदया गया है।

    23 डिसों र की िियनाक घटना

    जनकहत याकचका फाइल करने के चार कदन बाद ही एक ऐसी दुघदटना घटी कजसे टालने के कलए आभा कसंह ने संकल्प ले रिा था। 23 कदसंबर को गोवंडी खस्थत मोरया कोऑपरेकटव हाउकसंग सोसायटी में तीनमजदूरयायूंकहेंककशौचके गठनमेंउतरकरकामकरनेवालेगोकवंदचोरोकटया,संतोष कलशेकर और कवश्वजीत देबनाथ अपना काम करने के कलए सेकिक टैंक में उतरे ही थे कक उसके अंदर से जहरीली गैस का ररसाव होने से उसी टैंक में उनकी जान चली गई। बाद में पता चला कक टैंक में उतरने से पहले उन्हें ककसी भी प्रकार का सुरक्षा उपकरि या सेफ्टी कगयर नही ं कदया गया था। इस दददनाकहादसेकीिबरकमलतेहीश्रीमतीआभाकसंहनेउनपीकड़तोंके पररवारोंसेजाकरकमलीऔर तब उन्हें पता चला कक मारे गए लोग अपने अपने पररवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और उनकीमौतसेसभीलोगअनाथहोगएहैंऔरउनके समक्षरोजीरोटीकासंकटउत्पन्नहोगयाहै।

मैनुअलस्केवेंडिोंगसेसों ोंडितअन्यिुघयटनाएों:

गोवंडी खस्थत मोरया कोऑपरेकटव हाउकसंग सोसायटी की दुघदटना एकलौती घटना नहीं थी। इससे पहले भीइसतरहके कीहादसेमुंबईऔरइसके आसपासके शहरोंमेंहोचुके हैं।आइएएकसरसरी कनगाह डालते हैं ..

MAY9,2019:भायंदरके तीनश्रकमकोंनेठािेमेंएकआवासीयसमाजके तीनसीवरोंकीसफाई कीलेककन चौथे की सफाई करते हए उनकी मौत हो गई।MAY4,2019:सेकिकटैंककीसफाईके दौराननालासोपोरामेंतीनश्रकमकोंकीमौतहोगई। NOV 12018: कल्याि में कीचड़ में ढंके 30 फीट के कु एं में जहरीले िुएं के कारि दो फायरमैन सकहत पांच लोगों की मौत हो गई।OCT26,2018:तीनठेकामजदूरोंनेडोकंबवलीपूवदमेंएकऔद्योकगकनालेकोसाफकरनेका आदेश कदयावो भी कबना ककसी सुरक्षा कगयर के । जहरीले िुएं के साथ अंदर प्रवेश करने के कु छ ही कमनटोंके भीतरमजदूरमरगए।

JAN 12018: आईआईटी पररसर के करीब पवई में एक सीवेज लाइन की सफाई करने वाले तीन ठे का मजदू रों की मौत।

िनडहत याडचका का सफर

िनवरी 2019

* माननीय कोटद ने मामले की पैरवी कर रही ं अडवोके ट ईशा कसंह को PEMSR ऐक्ट का उल्लंघन ककए जा रहे प्राविानों से संबंकित एक हलफनामा दायर करने की इजाज़त दी।

ठािे महानगरपाकलका की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अपनी तरफ से दायर हलफनामे में कहा ककअस्वच्छताशौचालयोंऔरसेकिकटैंकोंके कनमादिकीअनुमकतदेंऔरयकदवहीमौजूदहैं,तोयह पुरानी इमारतों में होना चाकहए.

उन्होनं े साथ ही साथ अपने बयान में यह भी कहा कक महानगरपाकलका PEMSR एक्ट 2013 के प्राविानों को कायादखन्वत करने की प्रकिया में है. उन्होनं े यह भी कहा कक कारपोरेशन इस मामले में अपना उत्तर देने के कलए थोड़ा वि चाहता है.

इस पर जवाब देते हए कोटद ने ठािे महानगरपाकलका को जवाब देने का वि कदयापरंतु साथ ही साथ बृहन्ुंबई महानगरपाकलका को भी संबंकित जनकहत याकचका का जवाब देने का कनदेश कदया।

17डिसों र2019

कोटद ने इस जनकहत याकचका के संदभद में राज्य सरकार से भी उसकी प्रकतकिया जाननी चाही और पूछा कक शौचालयों के नालों में काम कर रहे मजदू रों की मौत के बारे में इसका क्या कहना है।

कोटद ने कहा, "हम हमारे काकबल अकसस्टेंट पखिक प्रासीक्यूटर कमस्टर यागकनक को एक returnable तारीि से पहले जवाब दायर करने का कनदेश देते हैं।"

मुों ई कलेक्टर को ज्ञापन

मामले को ताककद क पररिकत तक पहंचाने के मकसद से प्रकसद्ध सामाकजक कायदकताद आभा कसंह ने मुंबई उपनगर के कजलाकिकारी कमकलंद बोरीकर से मुलाकात की और उनसे सुप्रीम कोटद के 2014 के आदेशानुसारअमृतनालासफाईककमदयोंको10लािरुपएप्रकतव्यखिके कहसाबसेमुआवजाकदलाने काआह्वानककयाकजनकीमौतमोरयाहाउकसंगसोसायटीके सेकिकटैंकमेंसफाईके दौरानदमघुटने सेहोगईथी।इसअवसरपरउनके साथवकीलईशाकसंहऔरसाथहीमृतकककमदयोंकीपकियां नीला कलसेकरबनी देवनाथ और कवमला चौरकसया ने भी आभा कसंह से कमलकर इस संदभद में सहायता का अनुरोि ककया। श्रीमती आभा कसंह ने कजलाकिकारी के समक्ष सूत्रीय मांगे रिी।

1) पीकड़त पररवार वालों को 10 लाि रुपये का मुआवजा
2) PEMSR ऐक्ट के सेक्शन 13 के तहत उनका पुनवादसउन्हें आवासीय सुकविा और बच्ों को पढाई

कलिाईऔररोजगारके अवसरमुहैयाकरायाजाए।

3) वह गोवंडी पुकलस को यह कनदेश दें कक मौत के मामले में पुकलस PEMSR एक्ट के प्राविानों का पालन करे।

मामले पर संज्ञान लेते हए कजलाकिकारी श्री बोरीकर ने उकचत कारदवाई का आश्वासन कदया।

मामले की मौिूिा स्थथडत

माननीय सुप्रीम कोटद ने सफाई कमदचारी आंदोलन मामले की सुनवाई करते हए स्पष्ट् रूप से जोर देकरकहाहैककनालेमेंकामकरतेसमयमजदूरोंकीहोनेवालीमौतोंके कसलकसलेमेंउनके पररवार वालों को पूरा मुआवजा कमलना ही चाकहए। सुप्रीम कोटद ने अपने आब्जवेशन में कहा कक ककसी भी खस्थकत में अगर ककसी नाले में उतर कर काम करने वाले मजदू र की मौत होती है और अगर उसने कोई सुरक्षाके उपकरिनहींपहनरिेहैंतोइसेएकअपरािमानाजानाचाकहएऔरइससूरतेहालमें मजदूरके पररवारवालोंको10लािरुपयेकीक्षकतपूकतददीजानीचाकहए।

परंतु दुभादग्य यह है कक सुप्रीम कोटद के कदशा कनदेशों का भी अब तक पालन करने की ककसी भी सरकारी एजेंसी ने या राज्य सरकारों ने कोई जहमत नही ं उठाई है। हां एक उम्मीद की ककरि जरूर कदिी जब मशहूर सामाकजक संस्था रोटरी क्लब ने सामने आकर मोरया हाउकसंग सोसाइटी हादसे में मारेगएतीनोंमजदूरोंके पररवारवालोंको30लािरुपएकाडोनेशनकदया।

इसके अकतररिमामलेकोऔरआगेबढानेके कलएऔरतीनोंपररवारोंकोइंसाफकदलानेके कलए कसकवल कसकवल सूट फाइल की जा रही है ताकक पीकड़त पररवारों को उनका हक कमल सके ।

क्या होना चाडहए

आभा कसंह का मानना है कक ऐसे मामलों में प्राथकमक जवाबदेही राज्य सरकार कक बनती है कक वह सीवेजमैनेजमेंटके मोचेपरएकव्यापकनीकतबनाएऔरउसपरकड़ाईसेअमलकरे।प्राकहकबशन आफ इम्प्लायमेंट आफ मैन्युअल स्कै वेंजसद एं ड देयर ररहैकबकलटेशन ऐक्ट 2013 (PEMSR ACT) और साल 2014 में सुप्रीम कोटद द्वारा कदए गए फ़ै सले का पूिदतया पालन हो।

इसके अकतररिसरकारकोचाकहएककपेशेसेजुड़ेमजदूरोंके पुनवदसनके कलएकोईवैकखल्पक रोजगार का रास्ता कनकाले। उनके खस्कल टरेकनंग दे और इसस तथ्य से उन्हे अवगत कराए कक कोई व्यखि, कान्ट्रैक्टर , सरकारी या प्राइवेट एजेंसी उन्हे हाथ से काम करने के कलए नहीं कह सकती। उनका यह भी मानना है कक इस कु प्रथा हो हाल करने के कलए टेक्नोलॉजी से युि मशीन का सहारा कलया जा सकता है कजसके जररए सीवर को कबना उसमें उतरे साफ ककया जा सकता है।

Abha Singh, 4/27/2021 12:00:00 AM


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